Betul News: अब तक शुरू नहीं हुई साईंखेड़ा जलाशय की बड़ी कैनाल

साईंखेड़ा थाना क्षेत्र के ग्राम सेमला के किसानों ने जिला मुख्यालय पहुंचकर कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

Betul News: बैतूल। किसानों और काश्तकारों के लिए योजनाओं के दावे तो बहुत किए जाते हैं लेकिन हकीकत इनसे कोसों दूर है। बैतूल(betul) जिला खेती-किसानी के लिए काफी मुफीद माना जाता है। क्षेत्र से पलायन रोकने में भी कृषि काफी हद तक सहायक है। कृषि की बेहतरी सिंचाई पर निर्भर है लेकिन अधिकांश क्षेत्रों में सिंचाई के हाल कुछ ठीक नहीं हैं। हाल ही में एक मामला थाना साईंखेड़ा(saikheda) से सामने आया है। यहां के किसानों ने जिला मुख्यालय पहुंचकर सिंचाई संबंधी समस्या से कलेक्टर को अवगत कराया।

किसानों की मांग है कि साईंखेड़ा जलाशय की मेन नहर से सिंचाई के लिए उन्हें पानी उपलब्ध करवाया जाए। साईंखेड़ा थाना क्षेत्र के ग्राम सेमला के किसान टीकाराम हरसूले, गुरुदेव साहू, रामचंद्र काटोलकर, रामबाबू हरसूले टीकाराम साहूकार सहित अन्य ग्रामीण किसानों ने बताया कि साईंखेड़ा जलाशय की बड़ी केनल अभी तक बंद पड़ी है। विभाग की अनदेखी के चलते नहर से किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है। जिस नहर से सिंचाई के लिए किसानों को पानी की आस थी उसी नहर को अधिकारी बड़े रकबे वाले किसानों के दबाव में शुरू नहीं कर रहे है। सिंचाई विभाग नहर को शीघ्र शुरू नहीं करेगा तो फसल सूखने की कगार पर पहुंच जाएगी।
छोटे एवं मध्यम वर्गीय किसानों को हो रही परेशानी 
कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में किसानों ने बताया कि उनके खेतों में गेहूं की बोवनी हो चुकी है। लगभग 1800 हेक्टेयर में छोटे छोटे किसान जो निम्न वर्ग के है। बड़ी केनल बन्द है। 700 हेक्टेयर वाली केनाल हमेशा चालू रहती है। उसमें बड़े रकबे वाले किसान है। इनके दबावमें आकर अधिकारी कैनाल पर ध्यान नहीं देते है। विगत चार से पाँच वर्षों से यही प्रक्रिया चल रही है।

सभी निम्न वर्ग के किसान सिंचाई विभाग के अधिकारियों से परेशान है। मेन नहर का गेट बन्द कर दिया जाता है और छोटी नहर का गेट हमेशा खुला रहता है। जिसका पानी नदी में बह जाता है। ग्रामीणों ने बताया कि वे नहर के मेट कृष्णा साहू से भी परेशान है। उन्होंने मेट को हटाने के साथ ही तत्काल नहर से पानी दिलाए जाने की मांग की।

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