आदिवासी की जमीन पर गैर आदिवासियों का कब्जा

आवेदक ने कलेक्टर से की शिकायत, नामांतरण निरस्त करने की मांग

Betul Mirror News: बैतूल। विगत कुछ वर्षों से बैतूल(betul) जिले में भू माफिया सक्रिय हो गए हैं। आदिवासियों की जमीन पर गैर आदिवासियों द्वारा कब्जा किए जाने के मामले भी लगातार सामने आ रहे हैं। बुधवार को आमला तहसील (Amla Tahsil) क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम हसलपुर में भी एक भूमि विवाद का मामला सामने आया जहां आदिवासी की भूमि पर गैर आदिवासी और अन्य लोगों द्वारा जालसाजी करते हुए अवैध नामांतरण कर भूमि पर कब्जा कर लिया गया। अब आवेदक तहसील कार्यालय के चक्कर काटने के लिए मजबूर है।

आवेदक ने बुधवार को जिला मुख्यालय पहुंचकर कलेक्टर (DM) से शिकायत करते हुए अवैध नामांतरण निरस्त करने की मांग की है। शिकायतकर्ता बलवंत सिंह पिता महंगीलाल धुर्वे आदिवासी ने शिकायत आवेदन में आरोप लगाया कि अनावेदक रोहित नारे पिता सुखदेव नारे निवासी आमला, मनोहर पवार पिता सुन्दरलाल पवार भीम नगर, सुनील कुमार पुण्डे देवगाव, जयंत पिता रामचंद्र नागपुर आदि ने डरा धमकाकर कब्जा लेने एवं जान से मारने की धमकी देकर उनकी पुश्तैनी जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया है।

आवेदक ने बताया कि अनावेदको ने ग्राम हसलपुर तह आमला के परिवार की पुश्तैनी भूमि खसरा नं. 39 कुल रकबा 1.125 हेक्ट स्थित ग्राम हसलपुर तह. आमला जिला बैतूल को फर्जी तरीके से विक्रय कर नामान्तरण भी कर दिया है।
पटवारी, आर.आई. के खिलाफ लगाया आरोप
शिकायतकर्ता बलवंत सिंह ने पटवारी (Patwari) आर आई के खिलाफ आरोप लगाते हुए बताया कि इनके द्वारा बार-बार परेशान करते हुए जेल में बंद करवाने की धमकी दी जा रही है। आवेदक ने कलेक्टर (collector) से आग्रह किया है कि इस मामले को गंभीरता पूर्वक संज्ञान में लेते हुए कार्यवाही कर पुश्तनी जमीन वापस दिलाई जाये।

अपराध में शामिल प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ भी कार्यवाही की जाए। जिस दिन से रजिस्ट्रेशन व नामान्तरण हुआ है, शासकीय दर से क्षतिपूर्ति राशि दिलाई जाए।
यह है नियम
आदिवासी की भूमि को अन्य लोगों को विक्रय करना एवं उसपर अवैध अतिक्रमण कर कब्जा करना गैर कानूनी है। म.प्र. भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 165 (6) (एक) के तहत ऐसे क्षेत्रों में आदिम जनजाति के किसी भूमि स्वामी का अधिकार किसी ऐसे व्यक्ति जो कि उक्त अधि सूचना में विनिर्दिष्ट किये गये क्षेत्र में कि ऐसे जनजाति का न हो तो दुबारा विक्रय या परिणाम स्वरूप न तो अतरित किया जायेगा और ना ही अन्तरणीय होगा उपबंधित है।

आदिवासियों, अनुसूचित जनजाति की जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा कर मकान या दुकान अन्य कोई भी कार्य किया गया हो तो अनुसूचित जनजाति / जाति उत्पीडन निवारण अधिनियम 1989 के दायरे में आता है, जो कि एससी- एसटी एट्रोसिटी एक्ट के मुकदमा दर्ज कराई जाए और जांच कर इस प्रकरण से संबंधित को नामजद आरोपी बनाते हुए सजा सुनाई जाए।

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