धरमू नही बनाया एआईसीसी मेंबर, अब सवाल यह कि साथ में रख कर किसने किया छल !

दो बार के विधायक धरमू सिंह को एआईसीसी मेंबर नहीं बनाए जाने से उठ रहे सवाल

Betul Mirror News: बैतूल। कांग्रेस में एआईसीसी डेलीगेट के रूप में धरमू सिंह या बह्मा भलावी (Brahma bhalavi) को न बनाए जाने से आदिवासी समाज में न खुशी देखी जा रही है और इसे कांग्रेस (Congress) का अन्याय माना जा रहा है। वरिष्ठ आदिवासी नेता कल्लू सिंह उइके का कहना है कि बैतूल (betul) आदिवासी बाहुल्य जिला है और लोकसभा सीट भी आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित है। इसलिए कम से कम एआईसीसी डेलीगेट आदिवासी वर्ग से होना चाहिए। उनका कहना है कि सीनियारटी और कुनबी समाज की बाहुल्यता को देखते हुए सुखदेव पांसे का बनाया जाना तो समझ आता है, लेकिन दूसरी डेलीगेट के लिए धरमू सिंह या बह्मा भलावी बेहतर विकल्प हो सकते थे, लेकिन लगता है कि किसी षडयंत्र के तहत डेलीगेट बनाने से वंचित किया गया। कई आदिवासी नेताओं का कहना है कि धरमू सिंह जिले में सबसे ज्यादा वोट से जीतने वाले विधायक(MLA) है। इसके अलावा वे दूसरी बार के विधायक है।

तीसरी बात यह कि वे आदिवासी है। इसलिए उनका हक हर हाल में बनता था। आदिवासी नेताओं का मानना है कि धरमू सिंह के साथ ही कहीं छल तो नहीं हो गया। फिलहाल धरमू सिंह विधायक निलय डागा (Nile Daga) के साथ बताए जाते हैं। ऐसे में निलय डागा का एआईसीसी मेंबर बन गए और धरमू सिंह (dharmu Singh) नहीं बन पाए। इसको लेकर कई तरह के सवाल है। जो भी लेकिन आदिवासी वर्ग में कांग्रेस का यह रवैया आने वाले चुनाव में कांग्रेस को नुकसान पहुंचाएगा। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के हेमंत सरियाम (Hemant sareaam) का कहना है कि कांग्रेस में पूंजीवाद चलता है इसलिए गरीब आदिवासियों को केवल वोट बैंक के लिए उपयोग किया जाता है। वजह जो भी लेकिन मामला पूरे आदिवासी समाज में चर्चा का विषय बना है।

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