हनुमान भक्त स्वर्गीय सुंदरलाल सपने में आकर मांगता है न्याय , एसडीओपी पर लगे आरोपो की अलग से नही हुई जांच !

बैतूल। हनुमान जयंती पर हॉस्पिटल स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर पर भंडारे का आयोजन किया गया था। इस भंडारे में मंदिर से जुड़े सभी भक्त बड़ी शिद्दत से स्वर्गीय सुंदरलाल को याद कर रहे थे। स्वर्गीय सुंदरलाल पंवार हनुमान जी के परमभक्त थे और इस मंदिर के केयर टेकर थी थे। सहज सरल और भले व्यक्ति सुंदर लाल की मौत सामान्य नही थी और उनको जानने वालों का कहना है कि इनके साथ न्याय नही हुआ। इसलिए सुंदरलाल की आत्मा अक्सर परिजन और मंदिर के अन्य भक्तों के सपने में आकर न्याय की गुहार लगाती है। स्वर्गीय सुंदर लाल स्वस्थ्य विभाग में लिपिक थे और उन्होंने आत्महत्या की थी। उनकी मौत की मीडिया रिपोर्ट्स बताती है कि उनकी पत्नी ने यह आरोप लगाया था कि स्वस्थ्य विभाग के भर्ती घोटाले में विवेचक बैतूल एसडीओपी उन्हें नहक परेशान कर रहे और अनावश्यक दबाब बना रहे थे, उन्होंने पूछताछ के नाम पर बेबजह बुलाकर घण्टो बैठाला जा रहा, बेबजह दबाब बनाया जा रहा था, जबकि उक्त भर्ती से उनका दूर दूर तक वास्ता ही नही था। सुंदरलाल की मौत के बाद उनकी पत्नी और परिजन के यह बयान मीडिया में आते ही एसडीओपी ने तत्काल डैमेज कंट्रोल करते हुए सुंदरलाल का सुसाइड नोट (हालांकि किसी भी तरह की मीडिया रिपोर्ट में उस सुसाइड नोट के सही होने की पुष्टि कभी नही की और न ही पुलिस ने कभी हेडरइटिंग एक्सपर्ट से पुष्टि की जानकारी सार्वजनिक की ) जारी कर अपनी सफाई पेश कर दी। वैसे मौके पर मौजूद एक मीडियाकर्मी का कहना है एसडीओपी के डैमेज कंट्रोल में किसी डॉ मालवीय की भी भूमिका है। चूंकि मामले में पुलिस ने आलरेडी भर्ती घोटाले में सीएमएचओ कार्यालय के एक लिपिक को आरोपी बना रखा था तो सुंदरलाल की मौत में भी पूरा ठीकरा उसके सिर फोड़कर एसडीओपी को बिना अलग से जांच हुए ही बच निकलने का मौका दे दिया गया। जबकि कायदे से इस मामले में न्यायिक जांच होना चाहिए था,या कम से कम एसडीओपी की विभागीय जांच तो एसपी को करवाना ही चाहिए था। यह भर्ती घोटाले से जुड़ी जांच में हुई मौत का मामला था ऐसे में इस संदिग्ध मौत में जांच तो होना ही चाहिए। बैतूल की जनता से वोट लेने वाले विधायक की भी यह नैतिक जिम्मेदारी थी कि वे इस मामले में जांच की मांग करते, विधानसभा प्रश्न लगाते पर वे ऐसा नही करेंगे। वही दूसरी और इस भर्ती घोटाले की जो विवेचना की है उस पर कई तरह के सवाल है जो पूरी विवेचना और विवेचक की नीयत पर प्रश्नचिन्ह लगाते है। वैसे भर्ती कांड के आरोपी हीरा सिंह की बात पर यकीन किया जाए तो यह बात पानी की तरह साफ हो जाएगी कि एसपी ने क्यो सुंदरलाल की पत्नी के लगाए आरोप की अलग से कोई विभागीय जांच नही करवाई और एसडीओपी को डैमेज कंट्रोल का पूरा मौका दिया था। बैतूल पुलिस है यह तो जो करे वह कम है पर कभी कभी अतीत के कर्म भविष्य में भी भूत बनकर पीछा नहीं छोड़ते लगता है अब पंचमुखी हनुमान मंदिर के साथी भक्तों की पुकार हनुमान सुनने वाले है और कोई है जो उस वक्त की मीडिया रिपोर्ट्स और सुंदरलाल की पत्नी के उस वक्त मीडिया में दिए बयान के आधार पर न्याय के लिए कोर्ट जरूर जाएगा। यदि किसी को लगता है कि उसके कर्म का कोई सबूत नही है पर हनुमान दद्दा न्याय के देवता है उनके सामने कोई चालाकी और प्रपंच नही चलता।  

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Leave A Reply

Your email address will not be published.